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Showing posts from November, 2017

MAHAKAL STATUS FOR SHIVRATRI

Khaba Fort Jaisalmer History

खाबा किला इसकी रहस्यमई कहानियो के लिए जाना जाता है | खाबा किला जैसलमेर के पास स्थित एक डरावनी जगह है | खाबा किले का सम्बन्ध पालीवाल ब्राह्मणो से है | यहाँ पर आप 80 परिवारों के खँडहर हुए घरों को देख सकते है, जिन्हे 200 साल पहले तबाह किया गया था |
इस जगह आप किला, म्यूजियम, और प्राचीन गांव देख सकते हैखाबा किला वास्तव में पालीवाल ब्राह्मणो का तबाह किया हुआ एक गांव है, जिसे वे ब्राह्मण 250 साल पहले किसी अज्ञात वजह से छोड़ गए थे | कुछ कहानियो के मुताबिक किसी बाहरी ताकत ने उन्हें गांव छोड़ने पर मजबूर किया था | और वे किसी और जगह जाकर रहने लगे, जिसके बारे में अभी किसी को कुछ नहीं पता है | कुछ कहानियो के मुताबिक वहां के राजा को ब्राह्मण की एक सुन्दर युवती पसंद आ गई थी | राजा उस लड़की से शादी करना चाहता था | लेकिन उस लड़की का परिवार इस बात से राजी नहीं था | और उन ब्राह्मणो को रातो रात वो गांव छोड़ना पड़ा | और कहा जाता है की वो ब्राह्मण राजस्थान के पाली जिले में जाकर बस गए | तब से खाबा किले के वहां कोई नहीं रहता है, तथा वह जगह पूरी तरह से तबाह कर दी गयी थी | खाबा किला अपने पीछे एक रहस्यमई कहानी छोड़ गय…

History of Rani Padmini of Chittor

रावल समरसिंह के बाद उनका पुत्र रत्नसिंह चितौड़ की राजगद्दी पर बैठा | रत्नसिंह की रानी पद्मिनी अपूर्व सुन्दर थी | उसकी सुन्दरता की ख्याति दूर दूर तक फैली थी | उसकी सुन्दरता के बारे में सुनकर दिल्ली का तत्कालीन बादशाह अल्लाउद्दीन खिलजी पद्मिनी को पाने के लिए लालायित हो उठा और उसने रानी को पाने हेतु चितौड़ दुर्ग पर एक विशाल सेना के साथ चढ़ाई कर दी | उसने चितौड़ के किले को कई महीनों घेरे रखा पर चितौड़ की रक्षार्थ तैनात राजपूत सैनिको के अदम्य साहस व वीरता के चलते कई महीनों की घेरा बंदी व युद्ध के बावजूद वह चितौड़ के किले में घुस नहीं पाया | तब उसने कूटनीति से काम लेने की योजना बनाई और अपने दूत को चितौड़ रत्नसिंह के पास भेज सन्देश भेजा कि “हम तो आपसे मित्रता करना चाहते है रानी की सुन्दरता के बारे बहुत सुना है सो हमें तो सिर्फ एक बार रानी का मुंह दिखा दीजिये हम घेरा उठाकर दिल्ली लौट जायेंगे l
सन्देश सुनकर रत्नसिंह आगबबुला हो उठे पर रानी पद्मिनी ने इस अवसर पर दूरदर्शिता का परिचय देते हुए अपने पति रत्नसिंह को समझाया कि ” मेरे कारण व्यर्थ ही चितौड़ के सैनिको का रक्त बहाना बुद्धिमानी नहीं है | …